Wednesday, February 22, 2017

शहीद हेमराज जिनका सिर ..पाकिस्तानी कायरों ने काट लिया और फिर शिश लोटकर कभी भारत नही आया |
उनकी बहन की चार पंक्ति में कल्पना सुनिये|


दादी का दुलार भुला, बाबुल का प्यार भुला
मोतियों की माला मेरी आज तक न लाया है |
होली वाले रंग भुला ,दीपों की उमंग भुला ..राखी का त्यौहार बार - बार बिसराया है
भाभी मेरा भैया तो जनम से भुलक्कड़ था
आज भी उस आदत को दोहराया है
जाते समय मैय्या के आशीष लेना भूल गया
आते समय रणथल में शीश भूल आया है |

Friday, February 3, 2017


हो गई है पीर पर्वत-सी


हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।
                                                   दुष्यंत कुमार